भैषज्यगुरु बुद्ध: इतिहास और प्रतिमा-विज्ञान
भैषज्यगुरु बुद्ध कहाँ से आए, उन्हें कैसे पहचानें और हर परंपरा उन्हें कैसे दर्शाती है।

भैषज्यगुरु बुद्ध महायान बौद्ध धर्म के एक बुद्ध हैं। उनका मुख्य ग्रंथ, भैषज्यगुरु सूत्र, भारत में ही प्रचलित था: इसकी संस्कृत पांडुलिपियों के अंश गिलगित में मिले, जो आज पाकिस्तान में है। इस सूत्र का चीनी भाषा में कई बार अनुवाद हुआ, जिनमें सबसे प्रसिद्ध 650 ईस्वी में ह्वेनसांग का और आठवीं शताब्दी की शुरुआत में यिजिंग का अनुवाद है।
उन्हें कैसे पहचानें
- गहरा नीला शरीर, जिसकी तुलना ग्रंथ वैडूर्य (लाजवर्द) से करते हैं।
- ध्यान मुद्रा में पद्मासन।
- गोद में रखे बाएँ हाथ में औषधि-पात्र या औषधि की डिबिया।
- दाहिना हाथ नीचे की ओर वरद मुद्रा में, अक्सर हरड़ (हरीतकी) की टहनी लिए हुए, जो एशिया के लगभग सभी पारंपरिक औषध-ग्रंथों में मिलने वाला फल है।
हर परंपरा का अपना रूप
तिब्बत में संग्ये मेनला को अक्सर सात अन्य भैषज्यगुरु बुद्धों के साथ चित्रित किया जाता है, जिससे आठ भैषज्यगुरु बुद्धों का समूह बनता है। चीन में उन्हें प्रायः विहार के मुख्य कक्ष में शाक्यमुनि और अमिताभ के साथ स्थापित किया जाता है। जापान में याकुशी न्योराई प्रायः बाएँ हाथ में छोटी औषधि-डिबिया लिए और दाहिना हाथ उठाए दिखते हैं, उनके दोनों ओर निक्को और गक्को बोधिसत्व होते हैं और बारह दिव्य सेनापति उनकी रक्षा करते हैं।
और जानें
ये अंतर कैटलॉग की मूर्तियों और थंका में साफ़ दिखते हैं। सूत्र और टीकाएँ पुस्तकें खंड में हैं।
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