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लेख

भैषज्यगुरु बुद्ध का मंत्र और उसका अर्थ

मंत्र का मूल पाठ, तिब्बती उच्चारण और शब्द-दर-शब्द अर्थ।

तिब्बती मंडल
तिब्बती मंडल · 1801–1900 · Rubin Museum of Art

भैषज्यगुरु बुद्ध का छोटा मंत्र तिब्बती बौद्ध धर्म में सबसे अधिक जपे जाने वाले मंत्रों में से है। सूत्र में एक लंबी धारणी भी है।

पाठ

संस्कृत: तद्यथा ॐ भैषज्ये भैषज्ये महाभैषज्ये भैषज्यराज समुद्गते स्वाहा।

तिब्बती उच्चारण में यह प्रायः ऐसा सुनाई देता है: “तायाथा ओम बेकान्ज़े बेकान्ज़े महा बेकान्ज़े रादज़ा समुद्गते सोहा”।

शब्द-दर-शब्द

  • तद्यथा: “इस प्रकार”, मंत्र का आरंभिक सूत्र।
  • ॐ: आरंभ का पवित्र अक्षर।
  • भैषज्ये, भैषज्ये: “हे औषधि, हे औषधि”।
  • महाभैषज्ये: “हे महान औषधि”।
  • भैषज्यराज समुद्गते: “हे औषधियों के राजा, जो प्रकट हुए हैं” या “जो उन्नत हैं”।
  • स्वाहा: समापन, “ऐसा ही हो”।

साधना में

परंपरागत रूप से मंत्र का जप माला के साथ, नीले बुद्ध का ध्यान करते हुए किया जाता है और उसका पुण्य सभी प्राणियों के कल्याण के लिए समर्पित किया जाता है। गुरु ज़ोर देते हैं कि यह आध्यात्मिक साधना है, उपचार नहीं। मंत्र सुनने के लिए संगीत और मंत्र देखें; गुरु से साधना सीखने के लिए सेवाएँ और स्थान देखें।

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